US attack on Venezuela latest news
2026 का साल शुरू होते ही दुनिया में एक बड़ा उलटफेर हो गया। 3 जनवरी 2026 को अमेरिका ने वेनेजुएला की राजधानी काराकास में ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व नाम से एक बड़ा सैन्य अभियान चलाया और सिटिंग राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस के साथ गिरफ्तार कर लिया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे “अमेरिकी सैन्य शक्ति की शानदार जीत” बताया। यह घटना दशकों बाद किसी विदेशी राष्ट्रपति को इस तरह कैप्चर करने का पहला मामला है और पूरी दुनिया में बहस छिड़ गई है। इस ब्लॉग में हम हर डिटेल कवर करेंगे – बैकग्राउंड, ऑपरेशन कैसे हुआ, कोर्ट में क्या हुआ, नया नेतृत्व और दुनिया की प्रतिक्रियाएं।

अमेरिका-वेनेजुएला के लंबे तनाव की कहानी
यह सब अचानक नहीं हुआ। निकोलस मादुरो 2013 से वेनेजुएला के राष्ट्रपति हैं, जो दिवंगत ह्यूगो शावेज के राजनीतिक वारिस थे। उनके शासन में वेनेजुएला आर्थिक तबाही का शिकार हुआ – हाइपरइन्फ्लेशन, भुखमरी, लाखों लोगों का पलायन, और तेल उत्पादन का भारी गिरावट। अमेरिका ने मादुरो पर गंभीर आरोप लगाए: ड्रग ट्रैफिकिंग, नार्को-टेररिज्म, और मानवाधिकार उल्लंघन।
2020 में ही अमेरिका ने मादुरो के सिर पर 15 मिलियन डॉलर का इनाम घोषित किया था। ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में तनाव चरम पर पहुंच गया। 2025 में अमेरिका ने वेनेजुएला के तेल टैंकर जब्त किए, समुद्री नाकाबंदी लगाई, और मादुरो को “नार्को-टेररिस्ट” कहा। दिसंबर 2025 में गुप्त वार्ताएं हुईं, लेकिन फेल हो गईं। अंत में, जनवरी 2026 में “ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व” लॉन्च हुआ – एक बेहद गोपनीय और तेज अभियान।
3 जनवरी की रात: कैसे हुआ पूरा ऑपरेशन?

रात के अंधेरे में अमेरिकी स्पेशल फोर्सेस (डेल्टा फोर्स और नेवी सील्स) ने काराकास पर हमला बोला। 150 से ज्यादा फाइटर जेट्स 20 एयरबेस से उड़े। पहले वेनेजुएला की एयर डिफेंस को जैम किया गया, फिर हेलिकॉप्टर्स से कमांडोज मादुरो के मिराफ्लोरेस पैलेस पर उतरे।
काराकास में जोरदार धमाके हुए, बिजली गुल हो गई, और कुछ इलाकों में आग की लपटें दिखीं। वेनेजुएला की सेना ने विरोध किया, लेकिन अमेरिकी प्लान इतना परफेक्ट था कि कोई बड़ा रेसिस्टेंस नहीं हो सका। अमेरिका ने दावा किया कि कोई यूएस सैनिक नहीं मारा गया (कुछ घायल जरूर हुए), जबकि वेनेजुएला ने दर्जनों नागरिक और सैनिक मौतों की बात कही। मादुरो दंपति को पहले यूएसएस इवो जिमा एयरक्राफ्ट कैरियर पर ले जाया गया, फिर न्यूयॉर्क।
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर सुबह घोषणा की: “हमने सफलतापूर्वक वेनेजुएला पर बड़ा स्ट्राइक किया और मादुरो को कैप्चर कर लिया।” उन्होंने इसे “अमेरिकी सैन्य शक्ति की जीत” बताया और कहा कि अमेरिका अब वेनेजुएला को “सुरक्षित ट्रांजिशन” तक चलाएगा, जिसमें तेल संसाधनों का उपयोग भी होगा।
न्यूयॉर्क कोर्ट में मादुरो: ऑरेंज जंपसूट और ‘किडनैप्ड’ का दावा

5 जनवरी को वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को न्यूयॉर्क स्थित मैनहट्टन फेडरल कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट रूम में मादुरो ऑरेंज जंपसूट पहने हुए दिखाई दिए और चलते समय वे लंगड़ाते नजर आए, जिससे यह आशंका जताई जा रही है कि हाल ही में हुए किसी ऑपरेशन के कारण उन्हें चोट लगी हो सकती है। सुनवाई के दौरान मादुरो ने नार्को-टेररिज्म, ड्रग ट्रैफिकिंग और अवैध हथियारों से जुड़े वर्षों पुराने आरोपों पर खुद को निर्दोष बताते हुए “नॉट गिल्टी” की दलील दी। इसके साथ ही उन्होंने कोर्ट में दावा किया, “मुझे किडनैप किया गया है, मैं आज भी वेनेजुएला का वैध राष्ट्रपति हूं।” वहीं उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस पूरे समय उदास और थकी हुई दिखाई दीं। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यह ट्रायल कई महीनों तक चल सकता है और यदि मादुरो दोषी पाए जाते हैं, तो उन्हें आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है।
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वेनेजुएला में नया चेहरा: डेल्सी रोड्रिगेज का उदय
राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की अनुपस्थिति के बीच वेनेजुएला में संवैधानिक प्रक्रिया के तहत 5 जनवरी को उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज को अंतरिम राष्ट्रपति के रूप में शपथ दिलाई गई। डेल्सी रोड्रिगेज मादुरो की करीबी सहयोगी मानी जाती हैं और सत्तारूढ़ सोशलिस्ट पार्टी की एक मजबूत और अनुभवी नेता के रूप में उनकी पहचान है। शपथ ग्रहण समारोह के दौरान उन्होंने अमेरिकी कार्रवाई को वेनेजुएला की संप्रभुता पर “आक्रमण और अपहरण” करार दिया, हालांकि इसके साथ ही उन्होंने देशवासियों से शांति बनाए रखने और किसी भी तरह की हिंसा से बचने की अपील भी की। मौजूदा हालात में वेनेजुएला की सेना ने डेल्सी रोड्रिगेज के नेतृत्व का समर्थन जताया है और फिलहाल राजधानी काराकास सहित देश के प्रमुख शहरों में बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन की खबरें सामने नहीं आई हैं।
दुनिया भर में बवाल: कौन समर्थन में, कौन विरोध में?

इस घटना ने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है और दुनिया को साफ तौर पर दो खेमों में बांट दिया है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UN Security Council) में इस मुद्दे पर तीखी बहस देखने को मिली, जहां कई देशों ने अमेरिका की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए, तो कुछ ने इसे सही ठहराने की कोशिश की।
विरोधी खेमा
अमेरिकी कार्रवाई का सबसे कड़ा विरोध रूस और चीन ने किया। दोनों देशों ने इसे किसी भी संप्रभु राष्ट्र की सॉवरेन्टी का खुला उल्लंघन बताया और अमेरिका के खिलाफ संभावित प्रतिबंधों की चेतावनी तक दे डाली।
लैटिन अमेरिकी देशों—मेक्सिको, ब्राजील, कोलंबिया और अर्जेंटीना—ने संगठन OAS (Organization of American States) में निंदा प्रस्ताव पारित करते हुए इस कदम को “इंपीरियलिज्म” करार दिया।
क्यूबा, ईरान और निकारागुआ की प्रतिक्रिया भी बेहद तीखी रही। क्यूबा ने यहां तक दावा किया कि इस कार्रवाई में उसके कुछ नागरिकों की मौत हुई है।
यूरोपीय संघ के भीतर भी एकमत नहीं दिखा। फ्रांस और स्पेन जैसे देशों ने इस कार्रवाई की कानूनी वैधता पर सवाल उठाए, हालांकि कुछ यूरोपीय देशों ने मादुरो सरकार की नीतियों और शासन शैली की आलोचना भी की।
समर्थन या तटस्थ रुख
दूसरी ओर, इजरायल और अमेरिका के कुछ करीबी सहयोगी देशों ने इस कदम का समर्थन किया और तत्कालीन अमेरिकी नेतृत्व की खुलकर तारीफ की।
वेनेजुएला के विपक्षी नेताओं—एडमुंडो गोंजालेज और मारिया कोरिना माचाडो—ने इसे देश में तानाशाही के अंत की शुरुआत बताया।
वहीं भारत और कुछ अफ्रीकी देशों ने संतुलित रुख अपनाते हुए किसी भी पक्ष का खुला समर्थन करने से बचते हुए केवल शांति, स्थिरता और कूटनीतिक समाधान की अपील की।
सड़कों पर भी दिखा असर
इस घटनाक्रम का असर सिर्फ कूटनीतिक मंचों तक सीमित नहीं रहा। दुनिया के कई हिस्सों में प्रदर्शन देखने को मिले। न्यूयॉर्क में कोर्ट के बाहर मादुरो समर्थकों और विरोधियों के बीच तीखी झड़पें हुईं, जबकि सैन फ्रांसिस्को समेत कुछ अमेरिकी शहरों में एंटी-यूएस रैलियां निकाली गईं।
आगे क्या होगा? प्रभाव और बड़े सवाल
यह ऑपरेशन वेनेजुएला के दशकों पुराने राजनीतिक और आर्थिक संकट का निर्णायक अंत साबित हो सकता है, लेकिन कई विशेषज्ञ इसे एक नई और गहरी अस्थिरता की शुरुआत भी मान रहे हैं। अमेरिका की नजर वेनेजुएला के विशाल तेल संसाधनों पर होने की चर्चा पहले से ही चलती रही है—ऐसे में दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार वाले इस देश को लेकर भू-राजनीतिक टकराव और तेज हो सकता है।
निकोलस मादुरो का ट्रायल लंबा चलने की संभावना है और इसके दौरान एक बड़ा कानूनी सवाल लगातार उठता रहेगा—क्या यह पूरी कार्रवाई एक वैध अंतरराष्ट्रीय गिरफ्तारी थी या फिर इसे एक राष्ट्राध्यक्ष के कथित “अपहरण” के रूप में देखा जाएगा। यही बहस आने वाले महीनों में अंतरराष्ट्रीय अदालतों, संयुक्त राष्ट्र और कूटनीतिक मंचों पर गूंज सकती है।
जमीनी स्तर पर इसके प्रभाव और भी गंभीर हो सकते हैं। राजनीतिक अनिश्चितता बढ़ने की स्थिति में वेनेजुएला से पलायन की समस्या और गहराने की आशंका जताई जा रही है, जिसका असर पूरे लैटिन अमेरिकी क्षेत्र पर पड़ेगा। साथ ही, क्षेत्रीय तनाव बढ़ने से पड़ोसी देशों की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर भी दबाव बन सकता है।
निष्कर्ष: इतिहास बदलने वाली घटना
दोस्तों, 2026 की यह घटना अब सिर्फ एक खबर नहीं रही, बल्कि इतिहास की किताबों में दर्ज होने वाला एक बड़ा मोड़ बन चुकी है। एक ओर अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी और संगठित अपराध के खिलाफ कार्रवाई का दावा किया जा रहा है, तो दूसरी ओर किसी संप्रभु राष्ट्र की सॉवरेन्टी और अंतरराष्ट्रीय कानून पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
यह मामला सिर्फ वेनेजुएला या अमेरिका तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल बन सकता है। आने वाले समय में यह तय करेगा कि वैश्विक राजनीति में ताकत का पलड़ा भारी रहेगा या कानून और कूटनीति की सीमाएं कायम रहेंगी।
अब सवाल आपसे है—क्या अमेरिका का यह कदम जायज था, या यह अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन? अपनी राय नीचे कमेंट्स में ज़रूर साझा करें।
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यह लेख विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। इसमें व्यक्त विचार किसी भी व्यक्ति, सरकार या संगठन के पक्ष या विरोध में नहीं हैं। मामले से जुड़ा अंतिम सत्य संबंधित न्यायालय और आधिकारिक एजेंसियों द्वारा तय किया जाएगा।