UGC Promotion of Equity Regulations 2026: Complete Analysis


इस लेख का उद्देश्य पाठकों को यह स्पष्ट और व्यवस्थित रूप से समझाना है कि UGC द्वारा वर्ष 2026 में लागू किए गए नए Promotion of Equity Regulations क्या हैं, उनका कानूनी आधार क्या है, उनका संस्थागत महत्व क्या है, तथा ये नियम किस प्रकार देश के उच्च शिक्षा संस्थानों में समान अवसर (Equity) और समावेशिता (Inclusion) को सुनिश्चित करने के लिए बनाए गए हैं। विषय की गंभीरता और व्यापकता को ध्यान में रखते हुए लेख की कुल शब्द संख्या 2200+ रखी गई है, ताकि सभी प्रावधानों का गहराई से विश्लेषण किया जा सके।


University Grants Commission (UGC) ने 13 जनवरी 2026 को University Grants Commission (Promotion of Equity in Higher Education Institutions) Regulations, 2026 शीर्षक से नए विनियम अधिसूचित किए। ये नियम 14 जनवरी 2026 को भारत के राजपत्र (Extraordinary) में प्रकाशित हुए और 15 जनवरी 2026 से देशभर के सभी उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रभावी हो गए।

इन विनियमों का निर्माण University Grants Commission Act, 1956 की धारा 26(1)(f) तथा धारा 26(1)(g) के अंतर्गत किया गया है। इन धाराओं के तहत UGC को यह वैधानिक अधिकार प्राप्त है कि वह:

  • उच्च शिक्षा संस्थानों में शैक्षणिक और प्रशासनिक मानकों का निर्धारण करे
  • विभिन्न विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा संस्थानों के बीच समन्वय स्थापित करे
  • समान अवसर, निष्पक्षता और गैर-भेदभाव सुनिश्चित करने हेतु नियामक ढांचा विकसित करे

वर्ष 2026 के इन नए विनियमों के लागू होने के साथ ही University Grants Commission (Promotion of Equity in Higher Educational Institutions) Regulations, 2012 को पूर्ण रूप से निरस्त कर दिया गया है। इसका स्पष्ट अर्थ यह है कि अब उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता, गैर-भेदभाव और समावेशिता से संबंधित सभी मामलों में केवल 2026 के नए नियम ही लागू और मान्य होंगे


इन विनियमों का प्राथमिक उद्देश्य देश के सभी Higher Education Institutions (HEIs) में किसी भी प्रकार के भेदभाव को रोकना है। विशेष रूप से, ये नियम निम्नलिखित आधारों पर होने वाले भेदभाव को समाप्त करने पर केंद्रित हैं:

  • जाति
  • धर्म
  • लिंग
  • जन्म स्थान
  • दिव्यांगता (Disability)
  • आर्थिक स्थिति
  • अथवा कोई भी अन्य सामाजिक या व्यक्तिगत आधार

साथ ही, इन विनियमों का उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में ऐसा शैक्षणिक और संस्थागत वातावरण विकसित करना है, जहाँ प्रत्येक छात्र, शोधार्थी, शिक्षक और कर्मचारी को समान अवसर, सम्मानजनक व्यवहार और समावेशी प्रणाली के अंतर्गत शिक्षा एवं कार्य करने का अवसर प्राप्त हो सके।

University Grants Commission (Promotion of Equity in Higher Education Institutions) Regulations, 2026 के Clause 3 में उपयोग किए गए प्रमुख शब्दों की परिभाषाएँ स्पष्ट रूप से दी गई हैं, ताकि नियमों के क्रियान्वयन के दौरान किसी प्रकार की अस्पष्टता या अलग-अलग व्याख्या की संभावना न रहे। ये परिभाषाएँ उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता, गैर-भेदभाव और समावेशिता सुनिश्चित करने के लिए आधार का कार्य करती हैं।

शब्द (Term) परिभाषा (Definition)
Discrimination
(भेदभाव)
किसी व्यक्ति के साथ किया गया असमान, अनुचित या प्रतिकूल व्यवहार, जो जाति, धर्म, लिंग, यौन अभिविन्यास, विकलांगता, भाषा, क्षेत्र, आर्थिक स्थिति या अन्य किसी आधार पर हो। इसमें जानबूझकर किया गया भेदभाव (Intentional) तथा अनजाने या अवचेतन पूर्वाग्रह (Implicit / Unconscious Bias)—दोनों शामिल हैं।
Caste-based Discrimination
(जाति आधारित भेदभाव)
अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) या अन्य सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों के विरुद्ध किया गया कोई भी जाति आधारित भेदभाव, जिसमें अपमान, सामाजिक बहिष्कार, अवसरों से वंचित करना या शैक्षणिक/प्रशासनिक नुकसान पहुँचाना शामिल है।
Equity
(समान अवसर)
सभी व्यक्तियों को समान अवसर प्रदान करने की अवधारणा, जिसमें वंचित या हाशिए पर मौजूद समूहों (Marginalized Groups) को उनकी विशेष आवश्यकताओं के अनुसार अतिरिक्त सहायता प्रदान की जाती है, ताकि वास्तविक और व्यावहारिक बराबरी सुनिश्चित की जा सके।
Higher Educational Institution (HEI) University Grants Commission के अंतर्गत आने वाली सभी यूनिवर्सिटी, डीम्ड यूनिवर्सिटी, कॉलेज, तथा ओपन, डिस्टेंस और ऑनलाइन मोड में शिक्षा प्रदान करने वाले उच्च शिक्षा संस्थान।
Aggrieved Person
(पीड़ित व्यक्ति)
वह कोई भी व्यक्ति जिसने उच्च शिक्षा संस्थान के भीतर भेदभाव का सामना किया हो और जिसने इस संबंध में औपचारिक शिकायत दर्ज की हो।
Marginalized Groups
(हाशिए पर मौजूद समूह)
इसमें अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS), महिलाएँ, ट्रांसजेंडर व्यक्ति, दिव्यांगजन, तथा धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यक शामिल हैं।

University Grants Commission (Promotion of Equity in Higher Education Institutions) Regulations, 2026 का Clause 2 इन विनियमों के लागू होने के दायरे (Applicability) को स्पष्ट रूप से परिभाषित करता है। इस क्लॉज के अनुसार, ये नियम केवल नीति-निर्देश नहीं हैं, बल्कि UGC द्वारा मान्यता प्राप्त उच्च शिक्षा संस्थानों (HEIs) पर कानूनी रूप से बाध्यकारी हैं और संस्थागत स्तर पर इनका अनुपालन अनिवार्य है।

लागू होने का क्षेत्र विवरण
संस्थान (Institutions) ये विनियम देश के सभी UGC द्वारा मान्यता प्राप्त Higher Educational Institutions (HEIs) पर लागू होते हैं, जिनमें केंद्रीय, राज्य, डीम्ड एवं निजी विश्वविद्यालय, संबद्ध कॉलेज तथा ओपन, डिस्टेंस और ऑनलाइन मोड में शिक्षा प्रदान करने वाले संस्थान शामिल हैं।
स्टेकहोल्डर्स (Stakeholders) इन नियमों का पालन संस्थान से जुड़े सभी पक्षों पर अनिवार्य है, जिनमें छात्र, शिक्षक/फैकल्टी, गैर-शिक्षण स्टाफ, प्रशासनिक अधिकारी, तथा संस्थान प्रमुख (कुलपति/प्रिंसिपल) शामिल हैं।
शैक्षणिक और प्रशासनिक क्षेत्र ये विनियम संस्थान की सभी प्रमुख गतिविधियों पर लागू होते हैं, जिनमें प्रवेश (Admission), हॉस्टल आवंटन, परीक्षा और मूल्यांकन, रिसर्च गाइडेंस, स्कॉलरशिप वितरण, प्लेसमेंट प्रक्रिया तथा अन्य शैक्षणिक एवं प्रशासनिक कार्य शामिल हैं।

University Grants Commission (Promotion of Equity in Higher Education Institutions) Regulations, 2026 के Clause 4 से Clause 8 तक उन संस्थागत व्यवस्थाओं का विवरण दिया गया है, जिन्हें प्रत्येक UGC-मान्यता प्राप्त Higher Education Institution (HEI) को अनिवार्य रूप से स्थापित और संचालित करना होगा। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में Equity, Inclusion और Non-Discrimination को केवल नीति स्तर पर नहीं, बल्कि व्यावहारिक और संस्थागत स्तर पर लागू करना है।

अनिवार्य रूप से स्थापित की जाने वाली संस्थागत इकाइयाँ

संस्थागत व्यवस्था प्रावधान (As per Regulations 2026)
Equal Opportunity Centre (EOC) प्रत्येक HEI में एक समर्पित Equal Opportunity Centre की स्थापना अनिवार्य है। यह केंद्र Equity और Inclusion से संबंधित नीतियाँ तैयार करेगा, जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करेगा तथा भेदभाव से जुड़ी शिकायतों की निगरानी करेगा। छोटे कॉलेजों के लिए उनकी संबद्ध विश्वविद्यालय का EOC यह भूमिका निभाएगा।
Coordinator EOC के संचालन हेतु एक सीनियर फैकल्टी सदस्य (प्रोफेसर स्तर) को Coordinator के रूप में नियुक्त किया जाएगा, जो केंद्र की गतिविधियों और रिपोर्टिंग के लिए उत्तरदायी होगा।
Equity Committee EOC के अंतर्गत एक Equity Committee का गठन अनिवार्य है, जो Equity से संबंधित मामलों, शिकायतों और नीतिगत अनुपालन की समीक्षा करेगी।
पद / सदस्य संख्या / विवरण
Chairperson संस्थान प्रमुख – कुलपति (VC) / प्रिंसिपल
सीनियर फैकल्टी सदस्य न्यूनतम 3 सीनियर फैकल्टी सदस्य
गैर-शिक्षण स्टाफ न्यूनतम 1 सदस्य
सिविल सोसाइटी सदस्य 2 बाहरी विशेषज्ञ (Equity / Social Justice क्षेत्र से)
छात्र प्रतिनिधि 2 छात्र, जो SC/ST/OBC/महिला/दिव्यांग वर्ग से हों
न्यूनतम बैठक समिति की बैठक वर्ष में कम से कम 2 बार आयोजित की जाएगी
व्यवस्था विवरण
Equity Helpline प्रत्येक HEI को 24×7 Equity Helpline (फोन/ऑनलाइन माध्यम) स्थापित करनी होगी, जहाँ भेदभाव से संबंधित शिकायतें दर्ज की जा सकें। शिकायतकर्ता की गोपनीयता (Confidentiality) सुनिश्चित करना अनिवार्य होगा।
Equity Squads एक मोबाइल निगरानी टीम, जो कैंपस के संवेदनशील क्षेत्रों जैसे हॉस्टल, कैंटीन, क्लासरूम आदि में Equity से जुड़े उल्लंघनों की निगरानी करेगी।
Equity Ambassadors प्रत्येक विभाग, हॉस्टल और लाइब्रेरी में एक नामित व्यक्ति, जो Equity को बढ़ावा देगा और किसी भी उल्लंघन की रिपोर्ट करेगा।
Sensitization & Awareness Programs फैकल्टी, स्टाफ और छात्रों के लिए वार्षिक अनिवार्य प्रशिक्षण। यह Induction Program का हिस्सा होगा तथा पोस्टर, सेमिनार और वर्कशॉप आयोजित करना अनिवार्य होगा।

University Grants Commission (Promotion of Equity in Higher Education Institutions) Regulations, 2026 का Clause 9 उच्च शिक्षा संस्थानों में किसी भी प्रकार के भेदभाव पर पूर्ण प्रतिबंध लगाता है। यह प्रावधान सुनिश्चित करता है कि शैक्षणिक और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में सभी व्यक्तियों के साथ समान, निष्पक्ष और सम्मानजनक व्यवहार किया जाए।

प्रावधान विवरण (As per Clause 9)
जाति आधारित अलगाव (Segregation) उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति आधारित किसी भी प्रकार का अलगाव पूर्णतः प्रतिबंधित है। यह प्रतिबंध हॉस्टल, मेस, कक्षा समूह, ग्रुप प्रोजेक्ट तथा अन्य शैक्षणिक या सह-शैक्षणिक गतिविधियों पर समान रूप से लागू होगा।
अपमानजनक व्यवहार और उत्पीड़न किसी भी छात्र, शिक्षक या कर्मचारी के साथ अपमानजनक व्यवहार, उत्पीड़न (Harassment) या Victimisation की अनुमति नहीं होगी, चाहे वह प्रत्यक्ष हो या अप्रत्यक्ष।
शैक्षणिक पक्षपात निषेध प्रवेश (Admission), परीक्षा और मूल्यांकन, तथा रिसर्च गाइडेंस जैसे सभी शैक्षणिक क्षेत्रों में किसी भी प्रकार का पक्षपात प्रतिबंधित है।
Undertaking (घोषणा) सभी स्टेकहोल्डर्स—छात्र, फैकल्टी, गैर-शिक्षण स्टाफ और प्रशासनिक अधिकारी—से यह लिखित अंडरटेकिंग लेना अनिवार्य होगा कि वे किसी भी प्रकार के भेदभाव में शामिल नहीं होंगे।

University Grants Commission (Promotion of Equity in Higher Education Institutions) Regulations, 2026 के Clause 10 से 12 तक भेदभाव से संबंधित शिकायतों के दर्ज होने, जाँच और निवारण की एक स्पष्ट, समयबद्ध और जवाबदेह प्रक्रिया निर्धारित की गई है। इन प्रावधानों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शिकायतकर्ता को सुरक्षित, निष्पक्ष और प्रभावी न्याय प्रक्रिया उपलब्ध हो सके।

नियमों के अनुसार, किसी भी Aggrieved Person को भेदभाव से संबंधित शिकायत दर्ज कराने के लिए कई माध्यम उपलब्ध कराए गए हैं। शिकायत निम्नलिखित किसी भी रूप में की जा सकती है:

  • लिखित आवेदन
  • ई-मेल के माध्यम से
  • संस्थान के ऑनलाइन पोर्टल पर
  • Equity Helpline (फोन/ऑनलाइन) के माध्यम से
  • मौखिक शिकायत, जिसे अधिकृत रजिस्टर में दर्ज किया जाएगा

शिकायत प्राप्त होते ही संबंधित मामला Equity Committee को भेजा जाना अनिवार्य है।


नीचे दी गई तालिका Clause 10–12 के अंतर्गत निर्धारित प्रक्रिया और समय-सीमा को संक्षेप में प्रस्तुत करती है:

चरण निर्धारित प्रक्रिया
सूचना शिकायत प्राप्त होने के 24 घंटे के भीतर Equity Committee को सूचित किया जाना अनिवार्य है।
जाँच Equity Committee द्वारा शिकायत की जाँच कर 15 कार्य दिवसों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर संस्थान प्रमुख को सौंपी जाएगी।
निर्णय संस्थान प्रमुख (VC/प्रिंसिपल) को जाँच रिपोर्ट प्राप्त होने के 7 दिनों के भीतर निर्णय लेना होगा।

जाँच रिपोर्ट के आधार पर संस्थान प्रमुख द्वारा निम्नलिखित में से उपयुक्त कार्रवाई की जा सकती है:

  • चेतावनी (Warning)
  • निलंबन (Suspension)
  • अन्य अनुशासनात्मक या प्रशासनिक कार्रवाई, जैसा कि लागू नियमों के अंतर्गत उपयुक्त हो

यदि शिकायत संस्थान प्रमुख (VC/प्रिंसिपल) के विरुद्ध हो, तो ऐसी स्थिति में EOC Coordinator को Equity Committee का Chairperson नियुक्त किया जाएगा, ताकि जाँच निष्पक्ष बनी रहे।


इन विनियमों में यह स्पष्ट रूप से अनिवार्य किया गया है कि:

  • शिकायतकर्ता को किसी भी प्रकार की प्रतिशोधात्मक कार्रवाई (Retaliation) से सुरक्षित रखा जाएगा
  • शिकायत की प्रक्रिया के दौरान गोपनीयता (Confidentiality) और निष्पक्ष जाँच सुनिश्चित की जाएगी

यदि शिकायतकर्ता संस्थागत निर्णय से संतुष्ट नहीं है, तो वह UGC (Grievance Redressal) Regulations, 2023 के अंतर्गत नियुक्त Ombudsperson के समक्ष 30 दिनों के भीतर अपील दायर कर सकता है।

University Grants Commission (Promotion of Equity in Higher Education Institutions) Regulations, 2026 के Clause 13 से Clause 15 तक भेदभाव के मामलों में उत्तरदायित्व तय करने और दंडात्मक कार्रवाई से संबंधित प्रावधान दिए गए हैं। ये प्रावधान यह स्पष्ट करते हैं कि नियमों का उल्लंघन करने पर व्यक्ति और संस्थान—दोनों स्तरों पर कार्रवाई की जा सकती है।

यदि भेदभाव का दोष किसी छात्र, फैकल्टी सदस्य, गैर-शिक्षण स्टाफ या अन्य कर्मचारी पर सिद्ध होता है, तो संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध कार्रवाई संस्थान के सेवा नियमों (Service Rules) या अनुशासनात्मक नियमों (Disciplinary Rules) के अनुसार की जाएगी। इसमें शामिल हो सकते हैं:

  • लिखित चेतावनी (Warning)
  • वेतनवृद्धि या सुविधाओं पर रोक
  • निलंबन (Suspension)
  • सेवा से बर्खास्तगी (Termination / Dismissal)

गंभीर मामलों में, जहाँ भेदभाव आपराधिक प्रकृति का हो या अन्य कानूनों का उल्लंघन करता हो, वहाँ पुलिस या कानूनी कार्रवाई का प्रावधान भी खुला रखा गया है।

यदि कोई उच्च शिक्षा संस्थान (HEI) इन विनियमों का पालन करने में विफल रहता है, तो UGC को उसके विरुद्ध कठोर नियामक कार्रवाई करने का अधिकार प्राप्त है, जिनमें शामिल हैं:

  • UGC अनुदान (Grant) को आंशिक या पूर्ण रूप से रोकना
  • नए शैक्षणिक कार्यक्रम या कोर्स शुरू करने पर प्रतिबंध
  • डिग्री या डिप्लोमा कार्यक्रम ऑफर करने की अनुमति वापस लेना
  • UGC Act की Section 2(f) और 12(B) की सूची से संस्थान का नाम हटाना

UGC आवश्यकता पड़ने पर एक जांच समिति (Inquiry Committee) गठित कर सकता है, जो गैर-अनुपालन (Non-Compliance) की जाँच कर अंतिम निर्णय की सिफारिश करेगी।

Clause 16 से 18 के अंतर्गत इन विनियमों के निरंतर अनुपालन की निगरानी (Monitoring) और डेटा-आधारित रिपोर्टिंग की व्यवस्था की गई है, ताकि नियम केवल कागज़ी न रह जाएँ।

UGC द्वारा एक National Monitoring Committee का गठन किया जाएगा, जिसमें:

  • सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधि
  • अन्य नियामक परिषदों (Councils) के सदस्य
  • Equity और Higher Education से जुड़े विशेषज्ञ

शामिल होंगे। यह समिति देशभर में इन नियमों के कार्यान्वयन की समीक्षा करेगी।

सभी HEIs को वर्ष में दो बार (Bi-Annual Reporting) UGC को रिपोर्ट भेजना अनिवार्य होगा:

  • जनवरी
  • जुलाई

इन रिपोर्ट्स में निम्नलिखित जानकारी शामिल होगी:

  • छात्रों और कर्मचारियों का डेमोग्राफिक डेटा
  • ड्रॉपआउट रेट
  • दर्ज की गई शिकायतों की संख्या
  • की गई कार्रवाई और उनके परिणाम

UGC को यह अधिकार प्राप्त होगा कि वह:

  • कैंपस विज़िट करे
  • ऑडिट और रिव्यू कराए
  • आवश्यक निर्देश जारी करे

इन विनियमों का निर्माण अचानक नहीं हुआ, बल्कि यह एक लंबी संस्थागत और न्यायिक प्रक्रिया का परिणाम है।

  • 2012: UGC ने पहली बार Promotion of Equity Regulations जारी किए
  • 2016–2020: विभिन्न समितियों, जैसे Thorat Committee, ने उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव पर रिपोर्ट प्रस्तुत की
  • 2025: सुप्रीम कोर्ट ने UGC को अपडेटेड और प्रभावी नियम बनाने का निर्देश दिया
  • फरवरी 2025: 2026 विनियमों का ड्राफ्ट सार्वजनिक किया गया
  • 13 जनवरी 2026: अंतिम अधिसूचना जारी
  • 14 जनवरी 2026: भारत के राजपत्र में प्रकाशन
  • 15 जनवरी 2026: पूरे देश में नियम लागू

यह टाइमलाइन दर्शाती है कि 2026 के नियम पूर्व अनुभवों, रिपोर्ट्स और न्यायिक निर्देशों पर आधारित हैं।

25 जनवरी 2026 तक उपलब्ध आधिकारिक और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार:

  • UGC द्वारा इन विनियमों में कोई संशोधन या बदलाव नहीं किया गया
  • कई उच्च शिक्षा संस्थानों, जैसे DTU और अन्य विश्वविद्यालयों, ने EOC और Equity Committees के गठन से संबंधित नोटिस जारी किए
  • सोशल मीडिया और मीडिया रिपोर्ट्स में मिश्रित प्रतिक्रियाएँ सामने आईं
    • कुछ रिपोर्ट्स ने इसे Inclusion और Equity के लिए सकारात्मक कदम बताया
    • कुछ रिपोर्ट्स में परिभाषाओं की व्यापकता और दुरुपयोग की आशंका पर चिंता जताई गई
  • कुछ छात्र संगठनों ने विरोध दर्ज किया और #RollbackUGC2026 जैसे ट्रेंड्स देखे गए
  • शिक्षा मंत्री ने सार्वजनिक बयान में कहा कि विरोध कुछ vested interests द्वारा किया जा रहा है
  • किसी भी प्रकार का बड़ा संशोधन, रोलबैक या प्रमुख न्यायिक मामला रिपोर्ट नहीं हुआ

UGC की आधिकारिक वेबसाइट पर इन विनियमों का पूरा PDF उपलब्ध है।


ये नियम उच्च शिक्षा संस्थानों में भेदभाव रोकने के लिए एक मजबूत कानूनी और संस्थागत ढांचा प्रदान करते हैं। इनके उल्लंघन पर व्यक्ति और संस्थान—दोनों के लिए गंभीर परिणाम निर्धारित किए गए हैं।

Q1. क्या यह Grievance Redressal Mechanism सभी विश्वविद्यालयों पर लागू होता है?
हाँ, UGC से मान्यता प्राप्त सभी केंद्रीय, राज्य, डीम्ड और निजी विश्वविद्यालयों पर यह व्यवस्था लागू होती है।

Q2. क्या निजी कॉलेज और संस्थान भी इसके अंतर्गत आते हैं?
यदि कोई निजी कॉलेज या संस्थान UGC से संबद्ध या मान्यता प्राप्त है, तो उस पर भी ये नियम लागू होंगे।

Q3. शिकायत दर्ज करने के कौन-कौन से माध्यम मान्य हैं?
शिकायत लिखित रूप में, ईमेल द्वारा, ऑनलाइन पोर्टल, हेल्पलाइन या मौखिक रूप से (जिसे आधिकारिक रजिस्टर में दर्ज किया जाए) स्वीकार की जा सकती है।

Q4. शिकायत की जांच कितने समय में पूरी करनी होती है?
नियमों के अनुसार, जांच प्रक्रिया अधिकतम 15 कार्य दिवसों में पूरी कर रिपोर्ट संबंधित हेड को सौंपी जानी चाहिए।

Q5. अंतिम निर्णय कौन लेता है?
जांच रिपोर्ट मिलने के बाद संस्थान का हेड 7 दिनों के भीतर निर्णय लेता है, जिसमें चेतावनी, निलंबन या अन्य प्रशासनिक कार्रवाई शामिल हो सकती है।

Q6. यदि शिकायत हेड के खिलाफ हो तो क्या प्रक्रिया होगी?
ऐसी स्थिति में Coordinator को Equity Committee का चेयरपर्सन बनाया जाता है, ताकि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित हो सके।

Q7. क्या शिकायतकर्ता की पहचान सुरक्षित रहती है?
हाँ, गोपनीयता बनाए रखना और किसी भी प्रकार की retaliation (बदले की कार्रवाई) से शिकायतकर्ता की सुरक्षा करना अनिवार्य है।

Q8. अगर संस्थान के निर्णय से संतुष्ट न हों तो क्या विकल्प है?
शिकायतकर्ता UGC के 2023 Grievance Redressal Regulations के तहत 30 दिनों के भीतर Ombudsperson के पास अपील कर सकता है।

UGC द्वारा निर्धारित Grievance Redressal Mechanism के अंतर्गत छात्रों, कर्मचारियों और संबंधित पक्षों को शिकायत दर्ज करने का अधिकार दिया गया है। शिकायत विभिन्न माध्यमों से स्वीकार की जा सकती है और Equity Committee को 24 घंटे के भीतर सूचित करना अनिवार्य होता है। जांच प्रक्रिया समयबद्ध होती है और 15 कार्य दिवसों में पूरी कर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाती है। संस्थान प्रमुख को 7 दिनों में निर्णय लेना होता है। यदि शिकायत संस्थान प्रमुख के विरुद्ध हो, तो स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच हेतु Coordinator की अध्यक्षता में प्रक्रिया संचालित की जाती है। शिकायतकर्ता की सुरक्षा, गोपनीयता और निष्पक्षता इन नियमों के मूल सिद्धांत हैं। असंतोष की स्थिति में UGC Ombudsperson के समक्ष अपील का प्रावधान भी किया गया है।

Disclaimer

⚠️ Disclaimer

यह लेख University Grants Commission (UGC) द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचनाओं, भारत सरकार के राजपत्र (Gazette of India) तथा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध विश्वसनीय रिपोर्ट्स पर आधारित है। इसमें दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचना और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए प्रस्तुत की गई है। यह किसी प्रकार की कानूनी सलाह नहीं है।

किसी भी निर्णय, शिकायत या कानूनी कार्रवाई से पहले संबंधित विश्वविद्यालय, संस्थान या आधिकारिक UGC दस्तावेजों से जानकारी की पुष्टि करना पाठकों की जिम्मेदारी होगी। लेखक या प्रकाशक किसी भी प्रकार की कानूनी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता।


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